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Check Bounce : चेक बाउंस क्या होता है और चेक बाउंस हो जाने पर क्या करें, जिससे आपका पैसा मारे ना जा सकें !

चेक बाउंस क्या होता है और चेक बाउंस हो जाने पर क्या करें, जिससे आपका पैसा मारे न जा सकें !  चेक आमतौर पर एक कागज का टुकड़ा होता है जो राशि भुगतान करने का आदेश देता है, चेक देने वाला व्यक्ति, जिसे निर्माता कहते हैं उसका एक सेविंग खाता होता है जहां उसका राशि जमा होता है चेककर्ता, चेक पर धनराशि, दिनांक और आदत सहित कई विवरण लिखता है, और आदेश देते हुए हस्ताक्षर करता है, की उल्लिखित राशि को इस व्यक्ति या किसी कम्पनी को उनके बैंक द्वारा भुगतान किया जाए ! 


चेक बाउंस क्या होता है !

जब आप किसी के नाम से चेक जारी करते हैं तो वह उस चेक को बैंक में लगा देता है तो अगर आपके खाते में पैसा नहीं होता है, तो बैंक उस चेक को डीसऑनर कर देता हैं तो इसी को कहते हैं चेक बाउंस होना, इसी तरीके से आपने कोई चेक जारी किया है लेकिन उसपर सिग्नेचर आपने सही तरीके से नही किए हैं तो बैंक उस चेक को डिसऑनर कर देता हैं, अगर आप कोई भी चेक जाड़ी करते हैं और बैंक उस चेक को डिसऑनर कर देता है तो उसे चेक बाउंस कहते हैं !

चेक बाउंस हो जाए तो क्या करें !

आपने जो चेक बैंक में लगाया है अगर चेक बाउंस हो जाता है, तो आपको चेक के साथ एक स्लिप भी मिलती हैं, और उस स्लिप पर लिखा हुआ होता है की ये चेक क्यों बाउंस हुआ है !

अगर आपका चेक बाउंस हो गया है तो आप एक महीने के अंदर आपको चेक जारी करने वाले को एक लीगल नोटिस भेजना होता है, चेक चाहें किसी आदमी ने, कम्पनी ने या किसी सोसाइटी ने जारी किया हो, आप उसको लीगल नोटिस भेज सकते हैं लीगल नोटिस भेजने के लिए आप किसी लोकल वकील से मदद लें सकते हैं !

आमतौर पर एक वकील 300 से 500 चार्ज करते हैं, एक लीगल नोटिस भेजने के लिए, लीगल नोटिस में लिखा होता है आपने जो चेक दिया था वो चेक बाउंस हो चुका है और कारण भी लिखा हुआ होता है और आप चेक मिलने के बाद 15 दिन के अंदर पूरा पेमेंट कर दिजिए !

लीगल नोटिस भेजने के बाद आपको 15 दिन तक इंतजार करना होता है लेकिन 15 दिन के अंदर भी चेक जारी करने वाले के तरफ से कोई पेमेंट नहीं मिलता है तो आपका लास्ट ऑप्शन होता है केस फाइल करने का !

केस फाइल कैसे करें !

आप Instrument Act 1881 section 138 के तहत सिविल कोर्ट में केस फाइल कर सकते हैं, कोर्ट मे केस फाइल हो जाने के बाद लीगल प्रोसिडिंग शुरू हो जाती हैं, तब आप एक एप्लीकेशन मूव कर सकते है की मेरा जो चेक का अमाउंट हैं, उस अमाउंट का कुछ परसेंट केस के शुरू में ही दिला दिया जाय ! तब कोर्ट डिसाइड करता है की आपका कितना अमाउंट उस चेक का शुरू में ही दिया जाना चाहिए, ये कोर्ट चेक जारी करने वाले से राशि दिलाता हैं

इस तरह अगर आप केस जीत जाते है तो आपका चेक का जितना अमाउंट था वो चेक जारी करने वाले से दिलाया जाएगा, और जो कोर्ट ने कुछ परसेंट रुपया शुरू में ही दिला दिया था वो रुपया भी आपका ही रहेगा !



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